Wednesday, 11 June 2025

#SunnyDeol इफ़ेक्ट का शिकार दक्षिण का #Jaat !



दक्षिण के फिल्म निर्माता  Mythri Movie Makeers और पीपल मीडिया फैक्ट्री की निर्मिति और दक्षिण के निर्देशक गोपीचंद मालिनेनी निर्देशित फिल्म जाट में रिजायना कैसांद्रा, जगपति बाबू, रम्या कृष्णन, आदि जैसे दक्षिण के लोकप्रिय कलाकारों की भरमार है।

 




दक्षिण के निर्माता, निर्देशक और कलाकारों से भरी इस फिल्म का उत्तर भारत के दर्शकों के लिए बड़ा आकर्षण सनी  देओल है।  उनका साथ उत्तर भारत के जाने पहचाने रणदीप हूडा, सैयामी खेर, जरीना वहाब और मकरंद देशपांडे भी है।

 




किन्तु...किन्तु... इस फिल्म पर दक्षिण का प्रभाव तनिक भी दिखाई नहीं देता।  दक्षिण के लेखकों द्वारा लिखी गई, इस फिल्म पर बॉलीवुड का प्रभाव साफ़ साफ दिखाई देता।  या योन कहा जाये कि जाट अपने शीर्षक के अनुरूप सनी देओल के व्यक्तित्व पर निर्भर है।

 




फिल्म पर सनी देओल के प्रभाव का अनुमान इस प्रकार से लगाया जा सकता है कि फिल्म में सनी देओल बताते हैं कि उत्तर ने इस ढाई किलो के हाथ को देख  लिया, अब दक्षिण के लोग देखेंगे।  इस प्रकार से फिल्म में सनी देओल का चरित्र १९९३ की फिल्म दामिनी के नशेड़ी वकील की ताकत दिखाता है।




 

बात यही तक सीमित नहीं रहती।  फिल्म के तमाम दृश्य सनी देओल की ताकत दिखाने में लगे रहते है। वह ग़दर एक प्रेम कथा के जाट ड्राइवर तारा सिंह की तरह हैंड पंप तो नहीं उखाड़ते, किन्तु कभी पंखा और कभी खम्बा उखाड कर दुश्मनों को पीटते दिखाई देते है।  इससे फिल्म सनी देओल से बुरी तरह से प्रभावित लगने लगती है।

 




फिल्म में एक्शन है किन्तु, रोमांस और हास्य नदारद है।  जो भी थोड़ा बहुत हास्य है, वह सनी देओल इडली खाने, धक्के से इडली गिराने और नाम बताने वाले संवादों पर ही केंद्रित है।  यह कारण है कि सुस्त गति से चलती यह फिल्म अधिक सुस्त लगती है।

 




इसमें कोई संदेह नहीं कि सनी देओल ने अपना ब्रिग्रेडियर बलदेव प्रताप सिंह का चरित्र ठीक ठाक किया है।  किन्तु, फिल्म पर अपना प्रभाव डालते हैं, राणातुंगा की भूमिका में रणदीप हूडा।  वह अपने चरित्र को इतना प्रभावशाली प्रस्तुत करते हैं कि सनी देओल का ब्रिग्रेडियर स्वतः ही सशक्त बन जाता है।

 




रणदीप हूडा के बाद, यदि किसी अन्य कलाकार के अभिनय की बात की जाएगी तो वह सैयाम खेर नहीं, न ही जरीना वहाब, बल्कि दक्षिण की अभिनेत्री रिजायना कैसेंड्रा हैं। वह अपने राणातुंगा की पत्नी भारती के चरित्र को बिना अतिरेक के पूर्णतया क्रूर बनाती है। उनके चरित्र के सामने सैयामी खेर और जरीना वहाब के चरित्र याद नहीं रहते।





फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका लेखन और निदेशन है।  लेखकों ने अपने निर्देशक को सहयोग देने का तनिक प्रयास भी नहीं किया।  ऐसे में डॉन सीनू, बॉडीगार्ड और क्रैक में अपने प्रतिभा दिखा चुके गोपीचंद को फीका तो लगना ही था।

 




यह फिल्म ओटीटी प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है। इसलिए जो दर्शक इसे छवि गृहों में न देख सके हो, वह देख सकते है।  

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