Saturday, 14 June 2025

#Gunaah की राह पर चलता #Kankhajura




ओवर द टॉप अर्थात ओटीटी की त्रासदी बन गई है कि यह प्लेटफार्म या तो देशी विदेशी फिल्मों का सीरीज पर निर्भर हो गए है।  इनमे भी थ्रिलर, मर्डर या रहस्य वाले अपराध शो छाये हुए है।  चाहे आप डिज्नी [प्लस हॉटस्टार देखें या सोनी लिव या फिर नेटफ्लिक्स या ज़ी ५ ऐसे ही कार्यक्रमों की भरमार दिखाई देती है।

 




सोनी लिव पर ३० मई से स्ट्रीम हो रही सीरीज एक ऐसा ही उदाहरण है।  आठ किस्तों की यह श्रंखला हत्या षड़यंत्र, धोखा, रोमांस, रोमांस में धोखा और बदला पर केंद्रित है।  इस शो में रोशन मैथ्यू और मोहित रैना के साथ सारा जेन डिआस, त्रिनेत्र हालदार, निनाद कामत, महेश शेट्टी उषा नाडकर्णी, आदि अच्छे कलाकारों ने अपने चरित्र किये है।

 



इसे देखते हुए दर्शकों को ३ जून २०२४ से डिज्नी प्लस हॉटस्टार से प्रवाहित एक अन्य अपराध एक्शन ड्रामा सीरीज गुनाह की याद ताजा हो जाएगी। इन दोनों श्रृंखलाओं की कहानी काफी मिलती जुलती है। यद्यपि, कनखजूरा इसरायली सीरीज मैगपाई पर आधारित है तथा गुनाह को तुर्की की अपराध सीरीज एज़ेल पर आधारित बताया गया था।

 




किन्तु, इसी इन दोनों शो के चरित्रों की तुलना की जाये तो गुनाह में रोशन मैथ्यू के चरित्र का कनखजूरा में रोशन मैथ्यू के चरित्र से आसान मिलान हो जाता है।  सुरभि ज्योति की गुनाह की तारा और कनखजूरा की सारा जेन डिआस की निशा में भी समानता है।  यहाँ तक कि जैसे जैसे आप कहानी में आगे बढ़ते जाते है, यह समानता आगे बढती जाती है । किन्तु, देवों के देव महादेव के मोहित रैना सबसे अधिक प्रभावित करते है ।




 

अभिनय की बात की जाये तो किसी की भी प्रशंसा या आलोचना नहीं की जा सकती। इन शो के चरित्र इतने अधिक दोहराये गए है कि अब तो ओटीटी के शो देख कर कोई भी वैसे चरिता नक़ल कर सकता है।  क्या अच्छा होता यदि बॉलीवुड के लोग अच्छे लेखक ढूंढ कर कुछ अच्छा और मौलिक लिखवाते !

 



कनखजूरा का निर्देशन चन्दन अरोरा ने किया हैं।  उन्होंने वैसा ही निर्देशन किया है, जैसा गुनाह में अनिल सीनियर ने किया था।  किसी भी दृश्य में कहीं भी कल्पनाशीलता दिखाई नहीं देती। कनखजूरा पिटी लाइन पर चलता चला जाता है और अंत में ख़त्म हो जाता है। 

Wednesday, 11 June 2025

#SunnyDeol इफ़ेक्ट का शिकार दक्षिण का #Jaat !



दक्षिण के फिल्म निर्माता  Mythri Movie Makeers और पीपल मीडिया फैक्ट्री की निर्मिति और दक्षिण के निर्देशक गोपीचंद मालिनेनी निर्देशित फिल्म जाट में रिजायना कैसांद्रा, जगपति बाबू, रम्या कृष्णन, आदि जैसे दक्षिण के लोकप्रिय कलाकारों की भरमार है।

 




दक्षिण के निर्माता, निर्देशक और कलाकारों से भरी इस फिल्म का उत्तर भारत के दर्शकों के लिए बड़ा आकर्षण सनी  देओल है।  उनका साथ उत्तर भारत के जाने पहचाने रणदीप हूडा, सैयामी खेर, जरीना वहाब और मकरंद देशपांडे भी है।

 




किन्तु...किन्तु... इस फिल्म पर दक्षिण का प्रभाव तनिक भी दिखाई नहीं देता।  दक्षिण के लेखकों द्वारा लिखी गई, इस फिल्म पर बॉलीवुड का प्रभाव साफ़ साफ दिखाई देता।  या योन कहा जाये कि जाट अपने शीर्षक के अनुरूप सनी देओल के व्यक्तित्व पर निर्भर है।

 




फिल्म पर सनी देओल के प्रभाव का अनुमान इस प्रकार से लगाया जा सकता है कि फिल्म में सनी देओल बताते हैं कि उत्तर ने इस ढाई किलो के हाथ को देख  लिया, अब दक्षिण के लोग देखेंगे।  इस प्रकार से फिल्म में सनी देओल का चरित्र १९९३ की फिल्म दामिनी के नशेड़ी वकील की ताकत दिखाता है।




 

बात यही तक सीमित नहीं रहती।  फिल्म के तमाम दृश्य सनी देओल की ताकत दिखाने में लगे रहते है। वह ग़दर एक प्रेम कथा के जाट ड्राइवर तारा सिंह की तरह हैंड पंप तो नहीं उखाड़ते, किन्तु कभी पंखा और कभी खम्बा उखाड कर दुश्मनों को पीटते दिखाई देते है।  इससे फिल्म सनी देओल से बुरी तरह से प्रभावित लगने लगती है।

 




फिल्म में एक्शन है किन्तु, रोमांस और हास्य नदारद है।  जो भी थोड़ा बहुत हास्य है, वह सनी देओल इडली खाने, धक्के से इडली गिराने और नाम बताने वाले संवादों पर ही केंद्रित है।  यह कारण है कि सुस्त गति से चलती यह फिल्म अधिक सुस्त लगती है।

 




इसमें कोई संदेह नहीं कि सनी देओल ने अपना ब्रिग्रेडियर बलदेव प्रताप सिंह का चरित्र ठीक ठाक किया है।  किन्तु, फिल्म पर अपना प्रभाव डालते हैं, राणातुंगा की भूमिका में रणदीप हूडा।  वह अपने चरित्र को इतना प्रभावशाली प्रस्तुत करते हैं कि सनी देओल का ब्रिग्रेडियर स्वतः ही सशक्त बन जाता है।

 




रणदीप हूडा के बाद, यदि किसी अन्य कलाकार के अभिनय की बात की जाएगी तो वह सैयाम खेर नहीं, न ही जरीना वहाब, बल्कि दक्षिण की अभिनेत्री रिजायना कैसेंड्रा हैं। वह अपने राणातुंगा की पत्नी भारती के चरित्र को बिना अतिरेक के पूर्णतया क्रूर बनाती है। उनके चरित्र के सामने सैयामी खेर और जरीना वहाब के चरित्र याद नहीं रहते।





फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका लेखन और निदेशन है।  लेखकों ने अपने निर्देशक को सहयोग देने का तनिक प्रयास भी नहीं किया।  ऐसे में डॉन सीनू, बॉडीगार्ड और क्रैक में अपने प्रतिभा दिखा चुके गोपीचंद को फीका तो लगना ही था।

 




यह फिल्म ओटीटी प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है। इसलिए जो दर्शक इसे छवि गृहों में न देख सके हो, वह देख सकते है।  

#Gunaah की राह पर चलता #Kankhajura

ओवर द टॉप अर्थात ओटीटी की त्रासदी बन गई है कि यह प्लेटफार्म या तो देशी विदेशी फिल्मों का सीरीज पर निर्भर हो गए है।   इनमे भी थ्रिलर , मर्डर ...